राजस्थान हाईकोर्ट ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति में देरी पर सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने सरकार को यह प्रक्रिया 4 हफ्ते में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। नहीं तो संबंधित सचिव को अगली सुनवाई पर कोर्ट में पेश होना होगा। न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि नियुक्तियों में दो साल से ज्यादा का समय लग चुका है, जबकि आयोग के पदाधिकारियों का कार्यकाल सिर्फ तीन साल का होता है। सरकार ने बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई थी, पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने अतिरिक्त नाम मांगे। फाइल वापस आने पर चयन समिति ने नए सिरे से नाम चुने और दोबारा मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी, जो अभी विचाराधीन है। खंडपीठ ने कहा कि यह आयोग बच्चों के अधिकारों से जुड़ा जरूरी संस्थान है। नियुक्तियों में देरी से बच्चों को दिक्कतें आ रही हैं।