राजस्थान पुलिस ने बीट पुलिसिंग और यातायात व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ी पहल की है। बीट पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुखी बनाने के लिए राजस्थान पुलिस और ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPRD), गृह मंत्रालय के बीच एमओयू हुआ है। वहीं, ट्रैफिक व्यवस्था को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए एमएनआईटी जयपुर में ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों की कार्यशाला आयोजित की गई। दोनों पहलों में तकनीक के साथ आमजन की भागीदारी और बेहतर पुलिसिंग पर विशेष जोर दिया गया। 9 जिलों से शुरू होगी हाईटेक बीट पुलिसिंग एमओयू के तहत प्रथम चरण में नौ जिलों में नवीन बीट प्रणाली लागू की गई है। इनमें सीकर, जयपुर उत्तर, धौलपुर, डीडवाना-कुचामन, कोटा शहर, डूंगरपुर, चूरू, जैसलमेर और जोधपुर पश्चिम शामिल हैं। इन जिलों में मिले अनुभव और अच्छे नवाचारों के आधार पर बाद में प्रदेश के शेष जिलों में भी इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। नई व्यवस्था में जनसंख्या, अपराध की स्थिति, भौगोलिक परिस्थितियों और शहरी-ग्रामीण स्वरूप के आधार पर बीट संरचना को तर्कसंगत बनाया जाएगा। हॉटस्पॉट, संवेदनशील स्थानों और महत्वपूर्ण संस्थानों की पहचान कर जियो-मैप्ड बीट प्रोफाइल तैयार किए जाएंगे। राजकॉप ई-बीट बुक में जुड़ेंगी नई तकनीकी सुविधाएं बीट पुलिसिंग में राजकॉप ई-बीट बुक, जीपीएस, जियो-टैगिंग, क्यूआर आधारित सुविधाएं, डिजिटल दस्तावेजीकरण और डैशबोर्ड का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। इससे बीट कर्मचारियों की गतिविधियों की निगरानी, स्थानीय सूचनाओं का अपडेट और अधिकारियों का पर्यवेक्षण अधिक प्रभावी होगा। बीट बुक, विलेज क्राइम नोट बुक और डिजिटल बीट प्रोफाइल के जरिए अपराध और हॉटस्पॉट की जानकारी को व्यवस्थित किया जाएगा। KPI यानी की-परफॉर्मेंस इंडिकेटर के आधार पर बीट पुलिसिंग की समीक्षा भी होगी। पुलिस और जनता के बीच बढ़ेगा सीधा संवाद नई बीट प्रणाली में CLG, पुलिस मित्र और 'नो योर बीट ऑफिसर' जैसी पहलों को मजबूत किया जाएगा। विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों तथा कमजोर और संवेदनशील वर्गों के साथ लक्षित संवाद पर भी जोर रहेगा। उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पुलिस को अपराध की सूचना और समस्याओं से समय रहते जोड़ना है। BPRD देगा विशेषज्ञ सहयोग एमओयू के तहत BPRD राजस्थान पुलिस को विशेषज्ञ मार्गदर्शन, प्रशिक्षण सामग्री, मॉडल प्रारूप, समीक्षा उपकरण और क्रियान्वयन का ढांचा उपलब्ध कराएगा। वहीं मैदानी संचालन, मानव संसाधन, लॉजिस्टिक्स, स्थानीय आदेश, प्रशिक्षण और तकनीकी संसाधनों की जिम्मेदारी राजस्थान पुलिस की होगी। राजस्थान पुलिस अकादमी को नोडल प्रशिक्षण संस्थान बनाया गया है। BPRD के महानिदेशक आलोक मित्तल ने कहा कि पुलिसिंग में बीट ही बेसिक है। उन्होंने राजस्थान पुलिस के बीट क्लस्टर कॉन्सेप्ट की सराहना की। डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि तकनीक के सहयोग से बीट पुलिसिंग में धरातल पर बेहतर परिणाम दिखाई देंगे। इससे अपराध रोकथाम, पुलिस-जन संवाद और स्थानीय स्तर पर पुलिस की प्रभावशीलता बढ़ेगी। ट्रैफिक व्यवस्था में भी तकनीक और डेटा पर जोर इसी दिन एमएनआईटी जयपुर में आयोजित कार्यशाला में प्रदेश के 26 से अधिक पुलिस अधिकारियों ने यातायात प्रबंधन से जुड़े विषयों पर मंथन किया। डीजी ट्रैफिक मालिनी अग्रवाल ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। यातायात नियमों की पालना और जिम्मेदार सड़क व्यवहार के लिए आमजन की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी जरूरी है। एडीजी ट्रैफिक डॉ. बीएल मीणा ने प्रदेश में यातायात व्यवस्था को और अधिक सुगम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नियमों की पालना के साथ आमजन को भी जागरूक करना आवश्यक है। एक नजर में- पुलिसिंग में बदलाव