राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) चुनाव ने राजस्थान की सियासत में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस चुनाव में एक तरफ भाजपा समर्थित पैनल है तो दूसरी ओर पार्टी के सीनियर नेताओं के बेटों का पैनल हैं। दोनों पैनल चुनाव में आमने-सामने खड़े हैं। नौबत ये आ गई है कि सीनियर नेताओं के बेटों के पैनल ने वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी पर भी वोटर्स को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। इस पूरे मामले में अब कांग्रेस भी उतर आई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि आरसीए का चुनाव अब खेल संगठन की नई कार्यकारिणी चुनने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भाजपा के भीतर राजनीतिक वर्चस्व, आपसी सहमति और कथित हस्तक्षेप को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक- अब दिल्ली बीजेपी आलाकमान तक यह मामला पहुंच गया है। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) चुनाव के दो पैनल RCA चुनाव में भाजपा समर्थित पैनल में अध्यक्ष पद पर ब्रजकिशोर उपाध्याय खड़े हुए हैं। वहीं पार्टी के सीनियर नेताओं के बेटों के पैनल के अध्यक्ष पद पर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर खड़े हैं। इनके ही पैनल में सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी और भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव हैं। डोटासरा ने अरुण चतुर्वेदी पर वोटर्स को डराने का लगाया आरोप आरसीए चुनाव विवाद को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान क्रिकेट संगठन के चुनाव सरकार साम, दाम, दंड और भेद की नीति अपनाकर कराना चाहती है, क्योंकि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराने में सक्षम नहीं है। डोटासरा ने अरुण चतुर्वेदी पर वोटर्स को डराने का आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग नियमों के तहत वोट डालने वाले थे, उन्हें रोका गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चुनाव का फैसला पर्ची के जरिए होना था, तो फिर पूरी चुनाव प्रक्रिया का दिखावा क्यों किया गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र का अपमान बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। RCA चुनाव में विवाद कैसे शुरू हुआ RCA में पिछले करीब ढाई साल से एडहॉक कमेटी के जरिए कामकाज संचालित किया जा रहा था। इस दौरान सरकार की ओर से बनाई गई व्यवस्था में राजनीतिक परिवारों से जुड़े चेहरों को तवज्जों दिए जाने की चर्चा रही। वहीं जब RCA की नई कार्यकारिणी चुनने के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई, तो समीकरण बदलते नजर आए। सरकार समर्थित पैनल के सामने भाजपा के ही सीनियर नेताओं के बेटे चुनावी मैदान में उतर गए। इससे पार्टी के भीतर सहमति बनाने की कोशिशों को झटका लगा और मामला मतदान तक पहुंच गया। चुनाव से पहले नामांकन वापसी के दौरान भाजपा के सीनियर नेताओं ने पांच नेता पुत्रों को मनाने का प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार- पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनसे नाम वापस लेने और आपसी सहमति से चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की अपील की थी। इस दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर चुनावी प्रक्रिया से पीछे हटने के लिए तैयार हो गए। दोनों ने चुनाव से दूरी बनाने का फैसला कर लिया। वहीं चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर, सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवारी और भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव मैदान में डटे रहे। इसके बाद मामला और उलझ गया। सरकार समर्थित पैनल के सामने भाजपा से जुड़े राजनीतिक परिवारों के इन चेहरों की मौजूदगी ने चुनाव को सियासी रंग दे दिया। अब पढ़िए- नेता पुत्रों ने क्या आरोप लगाए चिकित्सा मंत्री के बेटे बोले- यह पार्टी का नहीं, आत्मसम्मान का चुनाव चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले धनंजय सिंह खींवसर ने इसे किसी राजनीतिक पार्टी का चुनाव नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस सरकार के समय से ही क्रिकेट और खिलाड़ियों की बेहतरी के लिए काम करते आ रहे हैं। अब उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने का फैसला किया, लेकिन चुनाव में गड़बड़ी की गई है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। धनंजय के इस बयान को आरसीए चुनाव में सरकार समर्थित पैनल के सामने खड़े हुए विरोधी खेमे की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। चुनाव को लेकर असंतोष केवल नामांकन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। घनश्याम तिवाड़ी के बेटे बोले- कैबिनेट रैंक के व्यक्ति ने किया हस्तक्षेप सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी ने भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बिगाड़ने के लिए राजस्थान सरकार में कैबिनेट रैंक के एक व्यक्ति ने हस्तक्षेप किया। आशीष तिवारी के मुताबिक- चुनाव में शामिल सभी लोग भाजपा से जुड़े हैं, इसके बावजूद कुछ बाहरी लोगों ने आकर माहौल खराब करने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर्स को डराया और धमकाया गया। ऐसे में चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं हुआ। आशीष तिवाड़ी ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनके आरोपों के बाद चुनाव प्रक्रिया में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर विवाद और बढ़ गया है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आरोप किसी विपक्षी दल की ओर से नहीं, बल्कि भाजपा से जुड़े एक वरिष्ठ नेता के बेटे की ओर से लगाए गए हैं। विधायक जसवंत यादव के बेटे बोले- दोषियों पर हो कार्रवाई भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव ने भी आरसीए चुनाव में निष्पक्षता को जरूरी बताते हुए वोटर्स पर दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का निष्पक्ष चुनाव होना बेहद जरूरी है, लेकिन वोटर्स को डराया गया, जो गलत है। मोहित यादव ने कहा कि जब सभी लोग भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं, तो चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से पूरा किया जाना चाहिए था। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। तीनों नेता पुत्रों के एक जैसे आरोपों ने आरसीए चुनाव में राजनीतिक हस्तक्षेप और वोटर्स पर दबाव के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अरुण चतुर्वेदी ने अपने पर लगे आरोपों का दिया जवाब आरसीए चुनाव विवाद में वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी का नाम सामने आने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। धनंजय सिंह खींवसर, आशीष तिवाड़ी और मोहित यादव ने आरोप लगाया कि जिला क्रिकेट संघों के सचिवों, जो आरसीए चुनाव में मतदाता थे, उन्हें डराया-धमकाया गया और उन पर दबाव बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर्स से दबाव में मतदान कराने की कोशिश हुई और चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया गया। इन आरोपों को लेकर अरुण चतुर्वेदी ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष रूप से आयोजित हुआ है। वोटिंग के दौरान में वहां मौजूद नहीं थे। उससे पहले राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की कैंटीन में गए थे लेकिन उनके स्पष्टीकरण के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। इस पूरे घटनाक्रम ने आरसीए चुनाव को जयपुर से लेकर दिल्ली तक चर्चा का विषय बना दिया है।