एलर्जी अस्थमा विशेषज्ञ तथा आयोजन सचिव डॉ. लोकेश मान ने बताया कि राजस्थान में रेस्पिरेटरी मेडिसिन के क्षेत्र में सबसे बड़ी तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस राजपल्मोकॉन 2026 का भव्य एवं सफल आयोजन चौमूं पैलेस में किया गया। सम्मेलन में राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों से 400 से अधिक विशेषज्ञ पल्मोनोलॉजिस्ट एवं चिकित्सकों ने भाग लिया। आयोजन की व्यापकता और अकादमिक स्तर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सम्मेलन में 154 विशेषज्ञ फैकल्टी ने व्याख्यान, पैनल डिस्कशन, इंटरैक्टिव सेशन एवं उच्चस्तरीय वैज्ञानिक सिम्पोजियम में भाग लेकर अपने अनुभव और नवीनतम शोध साझा किए। आयोजन सचिव डॉ मान ने बताया कि राजपल्मोकॉन 2026 राजस्थान में अब तक आयोजित *सबसे अधिक फैकल्टी एवं विशेषज्ञ पल्मोनोलॉजिस्ट की भागीदारी वाली अत्यंत उच्चस्तरीय एवं अकादमिक रेस्पिरेटरी कॉन्फ्रेंस* रही। सम्मेलन का उद्देश्य रेस्पिरेटरी मेडिसिन के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध, चिकित्सा तकनीकों एवं उपचार के आधुनिक तरीकों को चिकित्सकों तक पहुंचाना तथा युवा पल्मोनोलॉजिस्ट को उच्चस्तरीय अकादमिक एवं व्यावहारिक मंच उपलब्ध कराना था। सम्मेलन का उद्घाटन *मुख्य अतिथि चोमू विधायक डॉ. शिखा मील बराला* की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में देशभर से आए वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि डॉ लोकेश मान को उनकी इस वैज्ञानिक दृष्टिकोण के लिए बहुत बधाई दी और शुभकानाए प्रेषित की। सम्मेलन की वैज्ञानिक गतिविधियों में विशेषज्ञों के बीच विचारों का आदान-प्रदान हुआ और रेस्पिरेटरी मेडिसिन के बदलते स्वरूप पर व्यापक चर्चा की गई। राजपल्मोकॉन 2026 के वैज्ञानिक कार्यक्रम में अस्थमा, एलर्जी, COPD, ILD, चेस्ट इन्फेक्शन, पल्मोनरी इंटरवेंशन तथा ICU एवं रेस्पिरेटरी क्रिटिकल केयर सहित रेस्पिरेटरी मेडिसिन के विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। विशेषज्ञों ने इन रोगों के निदान, आधुनिक उपचार एवं प्रबंधन में हो रही नई वैज्ञानिक प्रगति पर चर्चा की। नवीनतम शोध एवं साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों के साथ जटिल मरीजों के बेहतर प्रबंधन, गंभीर श्वसन रोगियों की ICU देखभाल तथा आधुनिक इंटरवेंशनल तकनीकों पर भी विशेष जोर दिया गया। वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों ने अपने क्लिनिकल अनुभव और शोध निष्कर्ष साझा किए, जिससे सम्मेलन में शामिल चिकित्सकों को दैनिक प्रैक्टिस में उपयोगी नवीनतम जानकारी प्राप्त हुई। इंटरैक्टिव पैनल डिस्कशन एवं केस-बेस्ड चर्चाओं ने कार्यक्रम को और अधिक व्यावहारिक बनाया । सम्मेलन में *154 फैकल्टी सदस्यों* की भागीदारी राजपल्मोकॉन 2026 की प्रमुख उपलब्धियों में रही। वरिष्ठ विशेषज्ञों ने विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों में व्याख्यान दिए तथा पैनल डिस्कशन के माध्यम से जटिल क्लिनिकल परिस्थितियों में उपचार की बेहतर रणनीतियों पर चर्चा की। डॉ. लोकेश मान ने बताया कि इतने बड़े स्तर पर विशेषज्ञ फैकल्टी को एक मंच पर लाना सम्मेलन की आयोजन समिति के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। रोहतक से डॉ ध्रुव चौधरी, रांची से डॉ अत्री, कोलकाता से डॉ अरूप हलदार, दिल्ली से डॉ खिलनानी, डॉ मनोज गोयल, एम्स दिल्ली से डॉ हाड़ा, डॉ दानवीर भादू सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भागीदारी ने सम्मेलन को बहुआयामी अकादमिक स्वरूप प्रदान किया। प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप बनी विशेष आकर्षण सम्मेलन से पूर्व आयोजित प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप में भी चिकित्सकों की शानदार भागीदारी रही। इसमें *125 से अधिक डेलीगेट्स एवं 40 फैकल्टी सदस्यों* ने हिस्सा लिया। वर्कशॉप को विशेष रूप से व्यावहारिक एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण पर केंद्रित रखा गया। वर्कशॉप में 8 विशेष हैंड्स-ऑन स्टेशन बनाए गए, जहां युवा एवं उभरते पल्मोनोलॉजिस्ट को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विभिन्न आधुनिक प्रक्रियाओं एवं तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया गया। इस पहल का उद्देश्य युवा चिकित्सकों में व्यावहारिक दक्षता बढ़ाना और उन्हें आधुनिक रेस्पिरेटरी मेडिसिन की तकनीकों से परिचित कराना था। वर्कशॉप के ऑर्गेनाइजर्स डॉ. जावेद कुरैशी एवं डॉ. चांद भंडारी ने इसके सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके समन्वय एवं प्रयासों से वर्कशॉप को इंटरैक्टिव एवं प्रैक्टिकल स्वरूप प्रदान किया गया। 8 हैंड्स-ऑन स्टेशन पर प्रतिभागियों को विशेषज्ञों से सीधे सीखने और तकनीकों को समझने का अवसर मिला । सम्मेलन में अकादमिक चर्चा के साथ-साथ *शोध, पेपर एवं पोस्टर प्रेजेंटेशन, क्विज तथा रिसर्च अवॉर्ड्स* जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया। इसका उद्देश्य युवा चिकित्सकों एवं पोस्टग्रेजुएट विद्यार्थियों को शोध कार्य प्रस्तुत करने तथा अपने अकादमिक कौशल को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना था। कांफ्रेंस सचिव डॉ. लोकेश मान ने कहा कि किसी भी वैज्ञानिक सम्मेलन की वास्तविक सफलता केवल प्रतिभागियों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि वहां से चिकित्सक कितना नया ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव लेकर लौटते हैं। राजपल्मोकॉन 2026 में इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए वैज्ञानिक कार्यक्रम तैयार किया गया था। आयोजन सचिव एवं एलर्जी-अस्थमा विशेषज्ञ डॉ. लोकेश मान* ने कहा कि राजपल्मोकॉन 2026 की सफलता किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है। इसके पीछे पूरी *आयोजन समिति के सदस्यों की महीनों की मेहनत, समर्पण, बेहतर समन्वय और टीमवर्क* रहा। उन्होंने बताया कि सम्मेलन की सफलता में वैज्ञानिक कार्यक्रम तैयार करने से लेकर देशभर के विशेषज्ञ फैकल्टी को आमंत्रित करने, डेलीगेट्स के समन्वय, रजिस्ट्रेशन, वर्कशॉप की व्यवस्थाओं, 8 हैंड्स-ऑन स्टेशन की तैयारी, आतिथ्य, मंच संचालन तथा विभिन्न प्रशासनिक व्यवस्थाओं में आयोजन समिति के प्रत्येक सदस्य ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि *400 से अधिक डेलीगेट्स, 154 फैकल्टी, 125 से अधिक वर्कशॉप प्रतिभागी, 40 वर्कशॉप फैकल्टी और 8 हैंड्स-ऑन स्टेशन* सम्मेलन की व्यापक सफलता को दर्शाते हैं। इतनी बड़ी संख्या में चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों की सहभागिता आयोजन समिति के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। डॉ. लोकेश मान, जो रेस्पिरेटरी मेडिसिन एवं विशेष रूप से एलर्जी और अस्थमा के क्षेत्र में कार्यरत हैं, ने सम्मेलन की सफलता के लिए मुख्य अतिथि **डॉ. शिखा मील बराला, देशभर से आए सभी वरिष्ठ विशेषज्ञों एवं फैकल्टी सदस्यों, डेलीगेट्स, वर्कशॉप के ऑर्गेनाइजर्स डॉ. जावेद कुरैशी एवं डॉ. चंद भंडारी, आयोजन समिति के सभी सदस्यों तथा सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राजपल्मोकॉन 2026 का उद्देश्य राजस्थान में रेस्पिरेटरी मेडिसिन के क्षेत्र में अकादमिक उत्कृष्टता, नवीनतम शोध, चिकित्सा नवाचार, व्यावहारिक प्रशिक्षण और बेहतर मरीज सेवाओं को बढ़ावा देना था। डॉ. लोकेश मान ने कहा कि सम्मेलन की अभूतपूर्व भागीदारी और उच्च अकादमिक स्तर से यह विश्वास मजबूत हुआ है कि राजस्थान में रेस्पिरेटरी मेडिसिन के क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के लिए और भी बड़े अवसर विकसित किए जा सकते हैं। राजपल्मोकॉन 2026 की शानदार सफलता ने न केवल राजस्थान बल्कि देशभर के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विशेषज्ञों को एक साझा अकादमिक मंच प्रदान किया, बल्कि आने वाले समय में चिकित्सा शिक्षा, शोध और मरीजों की बेहतर देखभाल के लिए नई दिशा और नई ऊर्जा भी प्रदान की।