सवाई माधोपुर | जिले में भाद्रपद शुक्ल दशमी पर रविवार को परंपरागत रोट दिवस मनाया गया। श्रद्धालुओं ने घरों में विशेष पूजा-अर्चना की और भगवान को रोट का भोग लगाया। सुबह स्नान के बाद महिलाओं ने घरों की साफ-सफाई की। इसके बाद विधि-विधान से पूजा कर गेहूं के आटे, घी और गुड़ से रोट तैयार किए गए। परिवारों ने भोग लगाने के बाद सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। कई घरों में रिश्तेदारों और परिचितों को प्रसाद के रूप में रोट वितरित किए गए। जिले में दशमी पर रोट बनाने की परंपरा हर साल श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। ज्योतिषाचार्य ताराचंद शास्त्री ने बताया कि इस परंपरा के पीछे पुरानी मान्यता जुड़ी है। कथा के अनुसार, एक गांव में रहने वाले गरीब परिवार ने अनाज की कमी के बावजूद पूजा और व्रत का संकल्प लिया। परिवार की महिला ने उपलब्ध आटा, गुड़ और घी से रोट बनाकर भोग लगाया और सुख-शांति की प्रार्थना की। मान्यता है कि श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान ने परिवार की अन्न-धन की कमी दूर कर दी।