सूफी पंजाबी संगीत, शायरी और अपनी खास गायकी के लिए दुनियाभर में पहचान बना चुके डॉ. सतिंदर सरताज एक बार फिर भारत के संगीतप्रेमियों से रूबरू होने जा रहे हैं। उनका ‘फिलोसोफी ऑफ रिजोनेंस’ इंडिया टूर 2026-27 जयपुर से शुरू होगा। 23 अक्टूबर को जयपुर में होने वाले कार्यक्रम के बाद सरताज देश के 30 से अधिक शहरों में प्रस्तुति देंगे। आधिकारिक कार्यक्रम सूची में जयपुर का शो 23 अक्टूबर को नोवोटेल जयपुर कन्वेंशन सेंटर में निर्धारित है। सरताज के इस दौरे को लेकर खास बात यह है कि यह सिर्फ संगीत कार्यक्रम नहीं, बल्कि पंजाबी सूफी कविता, शास्त्रीय संगीत और संवाद को एक साथ मंच पर लाने वाला अनुभव होगा। उनके कार्यक्रमों में गीतों के साथ शायरी और जीवन, प्रेम, रिश्तों और आध्यात्मिकता से जुड़े भाव भी प्रमुख हिस्सा होते हैं। आधिकारिक टूर जानकारी के अनुसार, इस दौरे में उनके संगीत में शास्त्रीय पंजाबी परंपरा, सूफी दर्शन और कविता का मेल देखने को मिलेगा। जयपुर में हजारों श्रोताओं के सामने प्रस्तुति जयपुर में होने वाले कार्यक्रम को भव्य स्तर पर आयोजित करने की तैयारी है। स्थानीय आयोजन और प्रोडक्शन की जिम्मेदारी संभाल रहे रॉयल अफेयर्स के संचालक राहुल राजपुरोहित ने बताया कि इस बार जयपुर का आयोजन बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है। आयोजकों के मुताबिक करीब 8 हजार दर्शकों को सरताज को लाइव सुनने का मौका मिलेगा। सरताज का भारत में लाइव संगीत का अपना बड़ा दर्शक वर्ग है। उनके आधिकारिक टूर प्लेटफॉर्म के अनुसार पिछले भारत दौरे में 34 शहरों में 2,68,700 से अधिक टिकटों की बिक्री हुई थी। इस बार भी देश के अलग-अलग हिस्सों में उनके कार्यक्रमों को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।
सामोद में कर चुके हैं गाने की शूटिंग जयपुर में होने वाले कार्यक्रम से पहले सतिंदर सरताज का राजस्थान से एक और जुड़ाव देखने को मिला है। हाल ही में उन्होंने जयपुर के सामोद गांव में अपने एक गीत की शूटिंग की। राजस्थान की विरासत और स्थापत्य से प्रभावित होकर शूट किए गए इस गीत को उनके इंडिया टूर से पहले जारी किए जाने की तैयारी है। सूफी संगीत, पंजाबी कविता और राजस्थान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का यह मेल उनके नए गीत में भी दिखाई देने की उम्मीद है।
जेएलएन स्टेडियम में 55 हजार तक की भीड़ के सामने प्रस्तुति सतिंदर सरताज ने भारत और विदेशों में कई बड़े मंचों पर प्रस्तुति दी है। लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल में उनका कार्यक्रम हुआ था, जो उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। वे दुनिया के अलग-अलग प्रमुख कॉन्सर्ट स्थलों पर भी प्रस्तुति दे चुके हैं। उनके आधिकारिक टूर प्लेटफॉर्म पर दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में करीब 55 हजार दर्शकों की क्षमता वाले शो का भी उल्लेख है। कार्नेगी हॉल, रॉयल अल्बर्ट हॉल, सिडनी ओपेरा हाउस और रॉड लेवर एरीना जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति देने वाले सरताज ने पंजाबी संगीत को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया है। गांव से शुरू हुआ संगीत का सफर सतिंदर सरताज का संगीत सफर पंजाब के होशियारपुर जिले के बजरावर गांव से शुरू हुआ। बचपन में ही उन्हें बांसुरी और सारंगी की धुनों ने आकर्षित किया। तीसरी कक्षा से ही वे बाल सभा में प्रस्तुति देने लगे थे। इसके बाद उन्होंने सरकारी कॉलेज होशियारपुर से संगीत में स्नातक की पढ़ाई की और जालंधर से शास्त्रीय संगीत में डिप्लोमा किया। आगे उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से संगीत में स्नातकोत्तर और एमफिल किया तथा सूफी गायन में पीएचडी की। फारसी भाषा का अध्ययन भी किया, ताकि सूफी साहित्य और उसकी मूल परंपरा को बेहतर तरीके से समझ सकें। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय में करीब छह वर्ष तक संगीत भी पढ़ाया। उनके नाम ‘सरताज’ का अर्थ भी ताज या मुकुट से जुड़ा है। कॉलेज के समय से ही उन्होंने कविता लिखना शुरू किया और इसी नाम को अपने साहित्यिक उपनाम के रूप में अपनाया। संगीत और कविता का यह मेल आगे चलकर उनकी पहचान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बना। यू-ट्यूब से मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान सरताज के करियर में 2008 का साल खास रहा, जब कनाडा के टोरंटो में एक कार्यक्रम के आयोजकों ने यू-ट्यूब पर उनका गायन सुनकर उन्हें प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद उनकी आवाज पंजाबी प्रवासी समुदाय के बीच तेजी से पहुंची और कनाडा, ब्रिटेन तथा ऑस्ट्रेलिया में उनके कार्यक्रमों का सिलसिला बढ़ा। 2011 में उन्हें ब्रिट एशिया टीवी म्यूजिक अवॉर्ड्स में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय कलाकार का सम्मान मिला। इसके बाद 2014 में रॉयल अल्बर्ट हॉल में प्रस्तुति ने उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को एक और बड़ा मंच दिया। 2017 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार और 2018 में ‘उड़ारियां’ के लिए संगीत वीडियो ऑफ द ईयर का ब्रिट एशिया टीवी म्यूजिक अवॉर्ड मिला। गायक के साथ अभिनेता भी सतिंदर सरताज की पहचान सिर्फ गायक और शायर तक सीमित नहीं रही। उन्होंने 2017 की फिल्म ‘द ब्लैक प्रिंस’ में महाराजा दलीप सिंह की भूमिका निभाकर अभिनय के क्षेत्र में भी कदम रखा। इसके बाद उन्होंने पंजाबी फिल्मों में भी काम किया। आधिकारिक जीवनी के अनुसार, वे ‘इक्को मिक्के’, ‘काली जोट्टा’ और अन्य फिल्मों का हिस्सा रहे हैं। हाल के वर्षों में फिल्म संगीत में भी उनकी मौजूदगी बढ़ी है। ‘धुरंधर: द रिवेंज’ में जैस्मिन सैंडलास के साथ उनका गीत ‘जाइए सजना’ चर्चा में रहा। इस गीत ने उनकी सूफियाना आवाज को फिल्म संगीत के नए दर्शक वर्ग तक पहुंचाया।