जोधपुर में आज बछ बारस का पर्व मनाया गया। महिलाओं ने पुत्र की लंबी उम्र, मंगलमय जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर गाय और बछड़े की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। यह पर्व हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर मनाया जाता है। गाय के पैरों की मिट्टी का माथे पर लगाया तिलक शनिचर जी का थान क्षेत्र में महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजन किया। महिलाओं ने गाय और उसके बछड़े को स्नान कराकर माथे पर कुमकुम-चावल का तिलक लगाया और नए वस्त्र ओढ़ाए। आरती उतारने के बाद महिलाओं ने गाय के पैरों की मिट्टी को अपने माथे पर लगाकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत भी गाए। मान्यता है कि बछ बारस का व्रत रखने से परिवार में सुख समृद्दि आती है। महिलाएं संतान की लंबी उम्र के लिए भी यह व्रत रखती है। इस पर्व की खास बात यह है कि इस दिन रसोई में गाय के दूध, दही या घी का उपयोग नहीं किया जाता। इसकी जगह भैंस या अन्य दूध का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही, भोजन में बाजरे की रोटी और अंकुरित अनाज की सब्जी विशेष रूप से बनाई जाती है।