सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए अतिथि शिक्षकों की विद्या संबल योजना की व्यवस्था शुरू हो रही है। राजस्थान राज्य सेवा निवृत अधिकारी कर्मचारी महासंघ राजसमंद ने 5 साल बाद भी पुराना मानदेय रहने पर चिंता जताई। महासंघ ने 2021 में अधूरी रही नियुक्ति प्रक्रिया का मुद्दा भी उठाया। संभाग महामंत्री प्रभु गिरि गोस्वामी ने बताया कि 2021 में गेस्ट फैकल्टी के लिए आवेदन मांगे गए थे। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किए। संबंधित स्कूलों में मेरिट भी बनी। प्रक्रिया नियुक्ति तक नहीं पहुंची। अब फिर से इसी योजना में प्रक्रिया शुरू हो रही है। मानदेय वही पुराना रखा गया है। गोस्वामी ने कहा कि 2021 के बाद आर्थिक हालात बदल चुके हैं। महंगाई बढ़ी है। दैनिक जरूरतों का खर्च बढ़ा है। आवागमन का खर्च बढ़ा है। ऐसे में पुराने मानदेय पर अतिथि शिक्षक के रूप में काम करना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षक योजना ठोस विकल्प नहीं है। सरकार को नियमित पदों पर स्थायी भर्ती प्रक्रिया तेज करनी चाहिए। इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी का स्थायी समाधान होगा। जिलाध्यक्ष घनश्याम जोशी और जिला महामंत्री सत्यनारायण व्यास ने कहा कि सरकार को मौजूदा महंगाई को देखते हुए विद्या संबल योजना में मानदेय तत्काल बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षक केवल पढ़ाते नहीं हैं। वे विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। महासंघ के जिला संगठन मंत्री राधेश्याम शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष परमेश्वर आचार्य, उपाध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल, मंत्री शिवलाल खींची, त्रिलोकी मोहन पुरोहित, कोषाध्यक्ष बंशीलाल रांका, शंकरलाल भाटी, अनिल परियानी, छगनलाल पालीवाल, सुरेश जोशी सहित अन्य पदाधिकारियों ने सरकार को पत्र भेजा है। पत्र में विद्या संबल योजना में नियुक्त होने वाले शिक्षकों का मानदेय वर्तमान महंगाई के अनुरूप बढ़ाने की मांग की गई है।