9 सितंबर बुधवार को नगर निगम का चुनाव होगा, जिसमें 65 वार्डों के 401 उम्मीदवारों का मतदाता भविष्य तय करेंगे। इसके साथ ही भाजपा और कांग्रेस के 20 से ज्यादा नेताओं के भी राजनीतिक कैरियर का उतार-चढ़ाव निर्धारित होगा। खास कर भाजपा नेताओं का। क्योंकि चुनाव को लीड कर रहे सभी नेताओं को 100 प्रतिशत जीत का टारगेट दिया है। उनके क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी की हार को हल्के में नहीं लिया जाएगा। विधायकों को उनके निर्वाचन क्षेत्र तक ही सीमित किया है। प्रदेश नेतृत्व का साफ संदेश है, परिणाम के बाद क्षेत्रवार प्रदर्शन की रिपोर्ट शीर्ष नेतृत्व तक जाएगी। इसी प्रकार कांग्रेस नेताओं के सामने भी चुनौती है। इसलिए पार्टी ने टिकट वितरण में फ्री हैंड दिया था।