राज्यावास | संतान प्राप्ति और पुत्र के मंगल की कामना को लेकर कस्बे में बछ बारस का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ग्रामीण महिलाओं ने स्नान के बाद रंग-बिरंगे परिधान पहनकर गाय और बछड़े की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने गाय-बछड़े को कुमकुम और भैंस के दूध से बने दही का तिलक लगाया। इसके बाद उन्हें मक्के की रोटी, चना और मूंग के बड़वे खिलाए गए। व्रत के दौरान महिलाओं ने अंकुरित चना, मूंग, मोठ, मक्के की रोटी और भैंस के दूध-दही का सेवन किया। इस दिन चाकू से कटी सामग्री, गेहूं, जौ और गाय के दूध से बनी वस्तुओं का प्रयोग वर्जित रहता है। महिलाओं ने गाय को वस्त्र ओढ़ाकर पूजा की और पारंपरिक कहानियां सुनीं।