अलवर जिला हॉस्पिटल के पुरुष सर्जिकल वार्ड में 22 मई की रात महिला से छेड़छाड़ के मामले में नर्सिंगकर्मी नरेंद्र फौजदार को राहत मिली है। पुलिस जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होने पर मामले में एफआर लगा दी गई थी। अब सोमवार को कोर्ट ने भी मामले में नर्सिंगकर्मी के पक्ष में आदेश जारी कर उसे निर्दोष माना है। दरअसल 22 मई की रात हॉस्पिटल के पुरुष सर्जिकल वार्ड 3 में भर्ती महिला ने नर्सिंगकर्मी नरेंद्र पर छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। आरोप के बाद हॉस्पिटल में जमकर हंगामा हुआ था। महिला और मरीजों के परिजनों ने नर्सिंगकर्मी के साथ मारपीट भी की थी। मामले में कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। महिला के बयान में विरोधाभास पाया गया पुलिस ने जांच के दौरान महिला, उसके पति, अन्य मरीजों और परिजनों के बयान दर्ज किए गए। घटना स्थल का निरीक्षण किया गया और हॉस्पिटल के रिकॉर्ड भी जुटाए गए। जांच में महिला के अलग-अलग बयानों में विरोधाभास सामने आया। प्रारंभिक बयान में उसने नर्सिंगकर्मी नरेंद्र पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था, जबकि कोर्ट में धारा 183 बीएनएसएस के तहत दिए बयान में महिला ने कहा कि अंधेरे में किसी ने उसके पैर को टच किया था। उसे यह पता नहीं था कि उसे किसने छुआ। जांच में मामला झूठा निकला जांच के दौरान महिला ने 100 रुपए के स्टाम्प पर शपथ-पत्र और कार्रवाई बंद करवाने के संबंध में हस्तलिखित प्रार्थना-पत्र भी पुलिस को दिया। इसमें उसने कहा कि नरेंद्र सिंह ने उसके साथ कोई छेड़छाड़ या अभद्र हरकत नहीं की थी। उसने आवेश में आकर मामला दर्ज कराया था। वहीं वार्ड में भर्ती मरीज और उसके साथ मौजूद व्यक्ति के बयानों में भी नरेंद्र की ओर से छेड़छाड़ किए जाने की पुष्टि नहीं हुई। कोर्ट के आदेश के बाद नर्सिंगकर्मी को राहत पुलिस ने जांच के बाद आरोपों को प्रमाणित नहीं मानते हुए मामले को झूठा पाया और एफआर लगा दी हैं। अब कोर्ट से भी नरेंद्र सिंह के पक्ष में आदेश मिलने के बाद मामले में उसे राहत मिली है। जांच में सामने आया कि घटना के दौरान नर्सिंगकर्मी नरेंद्र वार्ड में रात्रि ड्यूटी पर था और मरीजों का राउंड लेकर नर्सिंग केबिन की तरफ जा रहा था। जांच में उसके खिलाफ छेड़छाड़ या जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने के आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए।