मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी और बायतु विधायक हरीश चौधरी ने शिव MLA रविंद्र सिंह भाटी की EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) सरलीकरण यात्रा का समर्थन किया है। उन्होंने कहा- आरक्षण के मुद्दे पर मेरी अपनी सोच और समझ है। अगर रविंद्र सिंह भाटी मुझे प्रेमपूर्वक बिना शर्त बुलाएंगे और अपनी बात रखने का मौका देंगे तो मैं उनके मंच पर भी जाऊंगा। मैं आरक्षण पर अपनी पूरी बात रखूंगा। हरीश चौधरी ने शनिवार को बाड़मेर के कांग्रेस ऑफिस में प्रेस वार्ता में कहा- मैं वैचारिक तौर पर RSS की विचारधारा को देश के लिए सबसे खतरनाक मानता हूं। हालांकि, अगर RSS के प्रचारक भी मेरे पास आएंगे तो मैं उन्हें नहीं रोकूंगा। उन्होंने कहा- अगर शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी मेरी ढाणी में आएंगे तो उनका स्वागत करूंगा। भाटी वैचारिक तौर पर निर्दलीय हैं। बाड़मेर के संदर्भ में कोई भी बात होगी तो मैं हर किसी के साथ खड़ा नजर आऊंगा। आरक्षण को लेकर EWS, ओबीसी और एससी-एसटी वर्गों में जो कमियां और विसंगतियां हैं, उन्हें दूर किया जाना चाहिए। इन वर्गों के साथ अन्याय हो रहा है। उनकी पीड़ा को समझकर संवैधानिक रूप से उनका हक देना चाहिए। देश सबका है, किसी को बांटना नहीं चाहिए विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि देश सबका है और किसी को बांटना नहीं चाहिए। अगर कोई पीछे रहेगा तो देश आगे नहीं बढ़ेगा। हरीश चौधरी ने उम्मीद जताई कि रविंद्र सिंह भाटी ओबीसी वर्ग में मौजूद विसंगतियों और उसकी पीड़ा को भी समझेंगे। एससी-एसटी आरक्षण के संदर्भ में हो रहे अन्याय को भी समझने की जरूरत है। RSS के प्रचारक भी मेरे पास आएंगे तो नहीं रोकूंगा हरीश चौधरी ने कहा कि मैं वैचारिक तौर पर RSS की विचारधारा को देश के लिए सबसे खतरनाक मानता हूं। हालांकि, अगर RSS के प्रचारक भी मेरे पास आएंगे तो मैं उन्हें नहीं रोकूंगा। उन्होंने कहा- अगर शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी मेरी ढाणी में आएंगे तो उनका स्वागत करूंगा। भाटी वैचारिक तौर पर निर्दलीय हैं। बाड़मेर के संदर्भ में कोई भी बात होगी तो मैं हर किसी के साथ खड़ा नजर आऊंगा। विधानसभा में उठा चुका हूं EWS सरलीकरण का मुद्दा हरीश चौधरी ने कहा कि मैं EWS में सरलीकरण का मुद्दा विधानसभा में उठा चुका हूं। उन्होंने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और जमीन की वास्तविक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज किसी के पास 100 बीघा जमीन है, लेकिन उससे व्यवहारिक तौर पर सालाना कुछ हजार रुपए भी नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जोधपुर की पॉश कॉलोनी में किसी के पास प्लॉट है तो उससे लाखों रुपए किराया मिल सकता है। ऐसे में जमीन की मात्रा के साथ उसकी वास्तविक आर्थिक स्थिति को भी समझना जरूरी है। क्या है EWS आरक्षण… केंद्र सरकार ने 103वें संविधान संशोधन अधिनियम के जरिए 14 जनवरी 2019 को EWS आरक्षण की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10% आरक्षण देना था। इस आरक्षण के दायरे में वो परिवार थे- जिनकी कुल सालाना आय 8 लाख रुपए से कम, 5 एकड़ से कम कृषि भूमि, 1000 वर्ग फीट से कम का आवासीय मकान या अधिसूचित नगरपालिकाओं में 100 गज से कम का प्लॉट हो। फरवरी 2019 में इस आरक्षण को राज्य में भी लागू कर दिया था। लेकिन कठिन शर्तों के चलते सर्टिफिकेट बनवाने में इस वर्ग से जुड़े युवाओं को कई दिक्कतें आ रही थीं। ऐसे में तत्कालीन राज्य सरकार ने 20 अक्टूबर को भूमि और भवन संबंधी सभी शर्तें हटाते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। EWS प्रमाण पत्र के लिए केवल 8 लाख की वार्षिक आय सीमा को ही आधार मानने का ऐलान कर दिया था। रविंद्र भाटी की आपत्तियां और मांग क्या हैं… सबसे बड़ी आपत्ति केंद्र सरकार के EWS की पात्रता के तहत आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के काश्तकारों की जमीन से जुड़े मापदंड को लेकर है। उनका कहना है कि देश के हर राज्य की भौगोलिक परिस्थिति, जमीन की उत्पादकता, सिंचाई व्यवस्था और बाजार मूल्य अलग-अलग होते हैं। पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में 5 एकड़ सूखी या बंजर जमीन की कीमत और पैदावार पंजाब या हरियाणा की सिंचित जमीन से बेहद कम होती है। इसलिए केवल जमीन के आकार के आधार पर किसी को अयोग्य ठहराना अनुचित है। इसके बजाय जमीन की असल उपयोगिता, स्थानीय कीमत और फसल पैदावार को भी मापदंड में शामिल किया जाना चाहिए। राज्य सरकार की ओर से जारी EWS प्रमाण पत्र को केंद्र सरकार की नौकरियों और केंद्रीय संस्थानों में भी सीधे मान्य किया जाए। ताकि युवाओं को दोहरी कागजी कार्रवाई न करनी पड़े। अपनी मांग को साबित करने के लिए उन्होंने आंकड़े दिए कि साल 2022-23 में राजस्थान सरकार ने जहां 2,77,555 EWS प्रमाण पत्र जारी किए। वहीं केंद्र के कड़े मानकों की वजह से सिर्फ 95,243 प्रमाण पत्र ही बन पाए। यह बड़ा अंतर साफ दिखाता है कि नियमों में सरलीकरण की कितनी सख्त जरूरत है। … यह खबर भी पढ़ें… रविंद्र भाटी पुलिस से बोले- दादागिरी जेब में रखें:सुधरे नहीं तो इलाज होगा; माइक बंद हुआ तो भड़के, कहा- आवाज नहीं दबेगी