जैसलमेर में खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने और बच्चों व आम लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाया। 'फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स' यानी चलती-फिरती जांच गाड़ी के जरिए शहर के राजकीय स्कूल किशनघाट और करणी बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कार्यक्रम किए गए। इस दौरान बच्चों को खाने-पीने की चीजों में मिलावट पहचानने के तरीके बताए गए और स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता भी जांची गई। डार्ट बुक से सिखाए मिलावट पहचानने के तरीके फूड सेफ्टी ऑफिसर किशनाराम कड़वासरा ने छात्र-छात्राओं को 'डार्ट बुक' की मदद से खाने-पीने की चीजों में होने वाली आम मिलावट की पहचान करने और मौके पर ही जांच करने के आसान तरीके सिखाए। बच्चों को साफ-सुथरा, पौष्टिक और सुरक्षित खान-पान अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि वे अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें। इस दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता परखने के लिए निरीक्षण और सैंपल लेने की कार्रवाई भी की गई। मिड-डे मील के आटा-चावल और मैगी के सैंपल लिए जांच के दौरान अधिकारियों ने स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता परखी। इसके लिए रसोई से आटा और चावल के सैंपल लिए गए। इसके अलावा स्कूलों के आसपास की दुकानों का भी निरीक्षण किया गया। यहां से मैगी और नूडल्स का एक सैंपल जांच के लिए लिया गया। रिपोर्ट आने के बाद होगी कानूनी कार्रवाई फूड सेफ्टी ऑफिसर किशनाराम कड़वासरा ने बताया - सभी सैंपल मानकों के अनुसार जांच के लिए अधिकृत प्रयोगशाला में भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद यदि खाद्य पदार्थों में किसी भी तरह की मिलावट पाई जाती है, तो नियमों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा अधिकारी किशनाराम कड़वासरा और डॉ. गणेशाराम की टीम ने की। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्कूलों और बाजारों में इस तरह की जांच आगे भी लगातार जारी रहेगी, ताकि बच्चों और आम लोगों को शुद्ध खाना मिल सके।