जयपुर नगर निगम चुनाव में मतदान खत्म होते ही असली सियासी खेल शुरू हो गया है। भाजपा ने अपने पार्षद प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी कर उन्हें एक जगह रखा है। प्रत्याशियों को सीधे मतगणना स्थल भेजने के बजाय सामूहिक रूप से नियंत्रित रखने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। पहली बार ऐसा होगा कि अपने वार्ड में अभिकर्ता ही बैठेगा और जीतने वाले पार्षद बाद में अपने-अपने रिटर्निंग ऑफिसर से जीत का प्रमाण-पत्र लेंगे। बाड़ाबंदी वाले ठिकाने पर रविवार को दिनभर भाजपा नेताओं का आना-जाना लगा रहा। पार्टी में बड़ी चिंता बागियों और निर्दलीयों को लेकर है। ज्यादा निर्दलीय होने से बोर्ड का गणित बहुमत के बजाय नतीजों के बाद बनने वाले समीकरणों पर निर्भर कर सकता है। मेयर के संभावित चेहरे पर चर्चा सबसे बड़ा सवाल अब मेयर के चेहरे को लेकर है। भाजपा के भीतर चर्चा है कि यदि पार्टी बहुमत हासिल करती है तो मेयर के लिए परकोटे के किसी वार्ड से चेहरा चुना जाए या बाहरी वार्डों में पार्टी के मजबूत प्रदर्शन और आबादी के आधार पर किसी पार्षद को आगे किया जाए। एकीकृत 150 वार्ड वाले नए जयपुर नगर निगम में यह फैसला पार्टी के लिए राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन दोनों लिहाज से अहम होगा। आज नतीजों के बाद असली खेल शुरू मतगणना सोमवार को सुबह 8 बजे से प्रस्तावित है। निगम के 150 वार्डों का परिणाम सामने आने के बाद ही साफ होगा कि भाजपा-कांग्रेस में किसके पास बोर्ड बनाने के लिए पर्याप्त संख्या है। इस बार 63.55% मतदान हुआ है और निर्दलीयों की भूमिका को लेकर दोनों दलों की चिंता बढ़ी हुई है। परिणाम आने तक प्रत्याशियों को एकजुट रखना और परिणाम के बाद उन्हें पाले में रखना सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती होगी।