पारंपरिक खेती के पैटर्न को बदलकर मुनाफे की राह पकड़ रहे जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। कम जमीन में सब्जियों के बेहतर और हाई-क्वालिटी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग पहली बार सपोर्ट सिस्टम पर 50 प्रतिशत तक अनुदान (सब्सिडी) दे रहा है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन (MIDH) के तहत शुरू हुई इस योजना का सीधा लाभ इसी सत्र से पात्र किसानों को मिलने लगेगा। किसान 0.40 से लेकर अधिकतम 2 हेक्टेयर तक खेती पर ले सकेंगे सब्सिडी का लाभ उद्यान विभाग के उप निदेशक डॉ. हीरसिंह राठौड़ ने बताया कि योजना का मुख्य मकसद आधुनिक तकनीक से कम क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण उत्पादन लेना है। इसके लिए सपोर्ट सिस्टम की प्रति हेक्टेयर यूनिट कॉस्ट 20 हजार रुपए तय की गई है, जिस पर 50% अनुदान मिलेगा। किसान न्यूनतम 0.40 हेक्टेयर से लेकर अधिकतम 2.00 हेक्टेयर तक के रकबे पर आनुपातिक आधार पर यह लाभ ले सकते हैं। विभाग ने इस वर्ष जिले के लिए श्रेणीवार कुल 70 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह सब्सिडी मुख्य रूप से टमाटर सहित बेल वाली फसलों-जैसे खीरा, लौकी, तोरई, करेला और टिंडा की खेती वाले किसानों को देंगे। सपोर्ट सिस्टम के फायदे फल जमीन से संपर्क में नहीं आते, खराब नहीं होते-पैदावार भी ज्यादा सपोर्ट सिस्टम बांस, तार या जाली का ढांचा होता है। इससे बेल को सही सहारा मिलता है। बेल जमीन पर फैलने के बजाय ऊपर बढ़ती है। इससे कम जगह में अधिक पैदावार होती है। फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, इसलिए सड़ने व खराब होने की आशंका कम रहती है। पौधों में हवा और धूप का बेहतर संचार होता है। फल की गुणवत्ता- आकार बेहतर रहता है। तोड़ाई, निराई-दवा का छिड़काव आसान।