राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के बीच राज्य निर्वाचन आयुक्त और रिटायर्ड आईएएस डॉ. राजेश्वर सिंह के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बना ली। फर्जी प्रोफाइल पर डॉ. राजेश्वर सिंह और मुख्य सचिव की कवर फोटो लगाई गई है। डॉ. राजेश्वर सिंह को मंगलवार को उनके नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनाए जाने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने तत्काल फेसबुक को इसकी रिपोर्ट की। साथ ही अपने संपर्क में रहने वाले लोगों को भी मैसेज के जरिए फर्जी प्रोफाइल की जानकारी देकर सतर्क रहने की सलाह दी। डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया- किसी अज्ञात व्यक्ति ने मेरे नाम और फोटो का इस्तेमाल करते हुए मेरी असली फेसबुक प्रोफाइल जैसी दिखने वाली फर्जी आईडी तैयार कर ली। मैसेज पर भरोसा नहीं करने की अपील डॉ. राजेश्वर सिंह के मुताबिक- फर्जी फेसबुक आईडी मेरी वास्तविक प्रोफाइल जैसी ही दिखाई देती है। जानकारी मिलते ही मैंने संबंधित प्रोफाइल को फेसबुक पर रिपोर्ट किया है। अब फेसबुक की टीम मामले की जांच कर रही है। उन्होंने अपने संपर्कों को आगाह किया है कि यदि मेरे नाम से फेसबुक पर कोई मैसेज आता है तो उस पर तुरंत भरोसा नहीं करें। खासतौर पर रुपए मांगने या किसी तरह की व्यक्तिगत जानकारी साझा करने वाले मैसेज की पहले पुष्टि करें। कई लोगों को भेजी फ्रेंड रिक्वेस्ट फिलहाल फर्जी फेसबुक आईडी से किसी व्यक्ति को मैसेज भेजकर ठगी करने का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि इस प्रोफाइल पर कई लोगों को फ्रेंड के रूप में जोड़ा गया है। कुछ लोगों को इसी फर्जी आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में आशंका है कि फर्जी प्रोफाइल बनाने वाला व्यक्ति आगे चलकर डॉ. राजेश्वर सिंह के परिचितों को निशाना बनाकर ठगी का प्रयास कर सकता है। IAS-IPS अधिकारियों की फर्जी प्रोफाइल बनाने के मामले पहले भी आए राजस्थान में वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी और अन्य सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाए जाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अधिकारियों के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के मामले सामने आते रहे हैं। इसके अलावा अधिकारियों की फोटो को WhatsApp की डिस्प्ले पिक्चर बनाकर उनके परिचितों को मैसेज भेजने और रुपए मांगने के जरिए ठगी का प्रयास किए जाने के मामले भी सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों में साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों को सोशल मीडिया पर मिले संदिग्ध संदेशों की पुष्टि करने और बिना सत्यापन किसी को पैसे नहीं भेजने की सलाह देते हैं।