राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री और ओलंपिक पदक विजेता कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ मंगलवार को चित्तौड़गढ़ दौरे पर रहे। सबसे पहले वे विधायक चंद्रभान सिंह आक्या के गांव पहुंचे, जहां उन्होंने विधायक के पिता राम सिंह के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की। इसके बाद उन्होंने खुद पूर्व सैन्य अधिकारी होने के कारण सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ जाने की इच्छा जताई। सैनिक स्कूल के शंकर मेनन सभागार में पहुंचकर उन्होंने कैडेट्स से सीधे बातचीत की। उन्होंने कहा कि सैनिक स्कूल जैसे संस्थान केवल पढ़ाई नहीं कराते, बल्कि ऐसे युवा तैयार करते हैं जो आगे चलकर देश की बड़ी जिम्मेदारियां संभालते हैं। उन्होंने कैडेट्स से कहा कि जीवन में बड़ा लक्ष्य तय करें और उसे पाने के लिए मेहनत, अनुशासन और लगातार सीखने की आदत कभी नहीं छोड़ें। उन्होंने कहा कि आज के समय में सफलता सिर्फ अच्छे नंबर लाने से नहीं मिलती, बल्कि अच्छी सोच, सही व्यवहार और खुद को लगातार बेहतर बनाने से मिलती है। स्कूल पहुंचने पर प्रिंसिपल कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया, वाइस प्रिंसिपल लेफ्टिनेंट कर्नल ईशा ठकराल और प्रशासनिक अधिकारी मेजर सी. श्रीकुमार ने उनका स्वागत किया। स्कूल कैप्टन कैडेट मधुसुदन सिंह राठौड़ ने मुख्य अतिथि का परिचय देते हुए उनके सैन्य, खेल और सार्वजनिक जीवन की उपलब्धियों से सभी को अवगत कराया। लीडर बनना सीखें स्कूल के जनसंपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने बताया कि कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने अपने संबोधन में कहा- हर कैडेट को नियमित किताबें पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। जितना ज्यादा पढ़ेंगे, उतना ही ज्ञान बढ़ेगा और सोच भी मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि अच्छी तरह अपनी बात रखना और दूसरों की बात समझना भी सफलता का बड़ा आधार है। इसलिए संवाद करने की कला सीखना जरूरी है। जीवन में कई काम अकेले नहीं होते, इसलिए दूसरों के साथ मिलकर काम करना सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर कैडेट के अंदर नेतृत्व की क्षमता होनी चाहिए और समय आने पर उसे जिम्मेदारी लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए। गलतियां होंगी, लेकिन उनसे सीखकर आगे बढ़ना ही असली सफलता अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि कोई भी व्यक्ति बिना गलती किए आगे नहीं बढ़ता। गलतियां होना सामान्य बात है, लेकिन उनसे सीख लेना सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा, असफल होना सफलता की पहचान है, बशर्ते हम अपनी गलतियों से सीखकर दोबारा प्रयास करें।" उन्होंने कैडेट्स से कहा कि असफलता से घबराने की बजाय उसे आगे बढ़ने का अवसर मानें। इस संस्थान ने देश को कई ऐसे लोग दिए हैं जिन्होंने बड़े पदों पर काम कर स्कूल का नाम रोशन किया। उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व थल सेना अध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह सुहाग सहित कई पूर्व छात्रों का जिक्र किया। कार्यक्रम के अंत में स्कूल कैप्टन कैडेट मधुसुदन सिंह राठौड़ ने आभार व्यक्त किया, जबकि प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया ने स्कूल परिवार की ओर से कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।