सीकर में सालासर रोड पर चल रही भागवत कथा में कथाव्यास इंद्रेश उपाध्याय ने भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला, कंस वध और रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई। कथा के 6वें दिन बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और संत-महंत पहुंचे। इस दौरान इंद्रेश उपाध्याय ने कहा किसी भी भौतिक चीज का घमंड नहीं करना चाहिए। शक्ति और पैसा तो वैसे भी स्थाई नहीं है। भगवान को पाना है तो भक्ति का घमंड नहीं करना चाहिए। वहीं, अंतिम दिन 7 अक्टूबर को कथा का समय बदला गया है। 7 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से कथा होगी और उसके बाद समापन होगा। आज की कथा की झलकियां… जो तर्क को समझ सके उसे ही समझाना चाहिए कथाव्यास इंद्रेश उपाध्याय ने कथा सुनाते हुए कहा- जो तर्क को समझ सके उसे ही समझाना चाहिए। वितर्क और कुतर्क करने वालों को समझाने से सिर्फ ऊर्जा खर्च होती है। जो पीछे वालों का सम्मान करते हैं, वो ही आगे बढ़ने के योग्य हैं। भगवान भक्त की परीक्षा लेते हैं, लेकिन कभी उसका मनोबल नहीं टूटने देते हैं। परेशानी आने पर, बाधाएं आने पर, असफल होने पर या दुख होने पर जो भगवान को छोड़ देते हैं, वो प्रेम नहीं स्वार्थ में लगे होते हैं। आकर्षक झांकी सजाई गई मंगलवार को कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह के अवसर पर आकर्षक झांकी सजाई गई, जिसे देखकर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर विवाह का उत्सव मनाया। कथा के छठे दिन जिला जज रूपा गुप्ता, एडीजे शालिनी गाेयल, मनोहर शरण महाराज पलसाना धाम, युगल शरण महाराज रेनवाल, अवधेशाचार्य महाराज लोहार्गल, संत महेशदास, पूर्व विधायक राजकुमारी शर्मा, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. कमल सिखवाल, शिक्षाविद डॉ. बलवंत सिंह चिराना, इंजी. श्रवण चौधरी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।